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Khatu Shyam: khatushyam ji story in hindi, khatushyamji, खाटूश्याम जी की कथा

 

Khatu Shyam: khatushyam ji story in hindi, khatushyamji, खाटूश्याम जी की कथा 


जय श्री श्याम 🚩📿

जय श्री श्याम बाबा 🙏🚩🙏

खाटू श्याम बाबा का प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित हैं ।


खाटू श्याम जी को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है।

करोड़ों लोग खाटू श्याम जी की पूजा करते हैं। श्याम मंदिर में हर वक्त भक्तों का तांता लगा रहता और विशेष रूप से पिछड़े जिले में खाटूश्याम का विशाल मेला आयोजित होता है।


 जिसमें राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के श्रद्धालु भी बाबा के दर्शन करने आते है।


खाटू श्याम की कहानी महाभारत काल से शुरू होती है, जिस वक्त उनका नाम बर्बरीक था।
 बर्बरीक भीम का पौत्र और घटोत्कच का पुत्र था।बर्बरीक बचपन से ही बहुत बडे वीर योद्धा थे। उन्होने अपनी मां से युद्ध कला सीखी । बर्बरीक देवी शक्ति के बहुत बड़े भक्त थे। बर्बरीक ने दैवीय शक्ति की कठोर तपस्या की। बर्बरीक की कठोर तपस्या देखकर दैवीय शक्ति वहा प्रकट हुई। और कहा आंखे खोलो पुत्र, तुम्हारा कल्याण हो ,मैं तुम्हारी तपस्या से अति प्रसन्न हू बोलो क्या वरदान चाहिए। बर्बरीक कहते है माते, आपने दर्शन देकर कृतार्थ कर दिया अब तो एक ही इच्छा है की आपका आशीर्वाद सदा बना रहे और अपना संपूर्ण जीवन दिन दुखियों की सेवा में व्यतीत कर सकू । माता कहती है तथास्तु । तुम सदा दुर्बलो का सहारा बनोगे । मैं तुम्हे ऐसी शक्ति प्रदान करूंगी जो तीनों लोकों में किसी के पास नहीं है। तुम् शक्तियों का दुरुपयोग नही करोगे। भगवती शक्ति ने वरदान स्वरूप तीन बाण दिए और कहा ये बाण अपने लक्ष्य को भेदकर वापस लौट आएंगे । 
बर्बरीक अब अजय हो गए।


 वे अपनी माता के पास पहुंचे और दैवीय शक्ति के वरदान के बारे में बताया और कहा मैं पांडवो और कोरवो के मध्य हो रहे युद्ध में भाग लूंगा। उनकी माताजी कहती है कि मैं जानती हूं की तुम वीर हो, साहसी हो इसलिए मैं तुम्हें रोकूंगी नही लेकिन तुम मुझे वचन दो की इस युद्ध में तुम हारे का सहारा बनोगे। तुम हारने वाली की तरफ से लड़ोगे। बर्बरीक अपनी माता को वचन देकर वहा से युद्ध के लिय तीन बाण लेकर नीले घोड़े पर सवार होकर प्रस्थान करते है। 


भगवान श्री कृष्ण तो अंतर्यामी है, वे सबकुछ जानते थे की कोरव ये युद्ध हारेंगे लेकिन बर्बरीक फिर उनकी तरफ से लड़ेगा और इससे पांडवो को युद्ध जीतने में परेशानी होगी इसलिए रास्ते में ही श्री कृष्ण ने ब्राह्मण का भेष बदलकर बर्बरीक को रोका और सोचा की बर्बरीक को रोकने का एक ही तरीका है की मुझे बर्बरीक का शीश का दान मांगना होगा क्योंकि बर्बरीक भी दानवीर थे किसी को भी कुछ मना नहीं करते थे। 

श्री कृष्ण कहते है रुको महावीर, कोन हो तुम, और इस कुरुक्षेत्र जो पांडवों और कोरवों का युद्ध क्षेत्र है। महावीर योद्धा कुरुक्षेत्र में क्या कर रहे हो। बर्बरीक श्री कृष्ण को कहते है कि है ब्राह्मण देव मैं घटोत्कच पुत्र हू,आप मेरा प्रणाम स्वीकार कीजिए ब्राह्मण देव। 

मैं महाभारत के युद्ध में सम्मिलित होने आया हूं । श्री कृष्ण कहते हैं कि ऐसा केसे हो सकता है, तुम सिर्फ़ तीन बाण से युद्ध में भाग लेने आए हों।

 बर्बरीक जी कहते है कि है ब्राह्मण देव ये कोई साधारण बाण नही है। इनमे से एक बाण भी शत्रु सेना को ध्वस्त करने के लिए पर्याप्त है। और ऐसा करने के बाद बाण वापिस तरकस में लौट आयेगा। 

श्री कृष्ण कहते हैं, अच्छा। तो फिर इस पीपल के पेड़ के सभी पत्तों को छेद कर दिखलाओ। बर्बरीक जी श्री कृष्ण की चुनौती स्वीकार कर पेड़ के पत्तों पर तीर चलाकर पेड़ के सभी पत्तों को भेद दिया। 

 और बाण श्री कृष्ण के पैर के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने लगा क्योंकि एक पत्ता उन्होंने अपने पैर के नीचे छुपा लिया। बर्बरीक जी श्री कृष्ण को कहते है कि आप अपना पैर यहां से हटा लीजिए वर्ना यह तीर आपके पैर को भी भेद देगा क्योंकि ये बिना लक्ष्य को भेदे वापस तरकश में नही आयेगा। 


श्री कृष्ण सोचते है को अगर में इस युद्ध में पांडवो को एक एक जगह छिपा भी दूंगा तो भी बर्बरीक के अचूक बाण उनको वहा भी हानि पहुंचा देंगे। श्री कृष्ण कहते हैं कि है वीर में तुम्हारे साहस की प्रशंसा करता हू। मै तुमसे दान स्वरूप कुछ मांगना चाहता हूं । बर्बरीक जी कहते है कि है ब्राह्मण देव अगर मेरे वश में हुआ तो मैं आपको दान अवश्य दूंगा, मै आपको वचन देता हू। श्री कृष्ण कहते हैं कि मुझे दान के रूप में तुम्हारे शीश का दान चाहिए। क्या ये दे सकते हो।


 यह सुनकर बर्बरीक जी को शक होता है की मेरे शीश दान से ब्राह्मण देव को क्या फायदा। ये कोई और ही है जो ब्राह्मण का भेष बदलकर आया है। बर्बरीक जी कहते है की कोन है आप, कृपा कर आप अपने वास्तविक रूप में आइए और मुझे अनुग्रहित करे। बर्बरीक के इतना विनती करने पर श्री कृष्ण अपने वास्तविक रूप में आ जाते है। बर्बरीक श्री कृष्ण को प्रणाम करते है और कहते है कि स्वयं वासुदेव मेरे शीश का दान मांगने आए, अवश्य कोई बात है। 


श्री कृष्ण कहते है की युद्ध भूमि के पूजन के लिय मुझे एक क्षत्रिय वीर की आवश्यकता है, और वो गुण तुम में है। इसलिए मैं तुम्हारे शीश का दान चाहता हूं। 


बर्बरीक जी कहते है की है प्रभु मैं आपको अपना शीश दान अवश्य दूंगा लेकीन मेरी दो इच्छाएं है।

 पहली यह की आप स्वयं मेरी देह को अग्नि देवोगे और 

दूसरी ये को मैं इस महाभारत का संपूर्ण युद्ध अपनी आंखो से देखता चाहता हू। 

तथास्तु कहकर श्री कृष्ण आशीर्वाद देते है और कहते है की है बर्बरीक टीम कलयुग में मेरे नाम से ही जानें जाओगे। तुम्हें कलयुग में लोग खाटू श्याम के नाम से जानेंगे।


 तुम हारे का सहारा बनोगे। 


फाल्गुन मास की द्वादशी को बर्बरीक जी ने अपने शीश का दान दिया। बर्बरीक को ब्रह्मा जी श्राप था की आपको मृत्यु पृथ्वी लोक में श्री कृष्ण द्वारा ही होगी। 


बर्बरीक का शीश युद्ध के समीप ही एक पहाड़ी पर सुसज्जित किया गया ,जहा से संपूर्ण महाभारत युद्ध को बर्बरीक द्वारा देखा जा सके।



संपूर्ण महाभारत युद्ध की समाप्ति पर पांडवों में ही आपसी बहस होने लगी है, की युद्ध की जीत का श्रेय किसे दिया जाय। तब श्री कृष्ण कहते है कि तुम्हें आपस में विवाद में पड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है। 


 बर्बरीक का शीश संपूर्ण युद्ध का साक्षी है। अतैव उससे बेहतर निर्णायक भला कौन हो सकता है।

 वासुदेव और पांडव इस निर्णय को जानने के लिए बर्बरीक के पास पहुंचते हैं और कहते है की इस युद्ध को जीतने का श्रेय किसे जाता है। 

तब खाटूश्याम रूपी बर्बरीक जी कहते है की

 श्रीकृष्ण ने युद्ध में विजय प्राप्त कराने में सबसे महान कार्य किया।

 उनकी शिक्षा, उनकी उपस्थिति, उनकी युद्धनीति ही निर्णायक थी ।

उन्हें युद्धभुमि में सिर्फ उनका सुदर्शन चक्र घूमता हुआ दिखाई दिया ,जो कि शत्रु सेना को काट रहा था।


 इस धर्म युद्ध को जीतने का संपूर्ण श्रेय भगवान श्रीकृष्ण को ही जाता हैं। वीर बर्बरीक की सभी पांडव सराहना करते हैं। और भगवान श्री कृष्ण से क्षमा मांगते हैं क्योंकि वो जानते थे की श्री कृष्ण के बीना इस धर्म युद्ध को जीतना असंभव था।


 धर्म की विजय स्वयं वासुदेव कृष्ण के कारण ही संभव हो पाई है। 

भगवान कृष्ण के आशीर्वाद से बर्बरीक को श्याम नाम से पुकारा जाने लगा और आज खाटू श्याम जी महाराज के भक्त उनके दर्शन करने जाते हैं, और मनवांछित फल की प्राप्ति करते हैं। 

बोलो हारे के सहारे की जय🚩🙏🙏

बोलो तीन बाण धारी की जय🚩

बोलो खाटू श्याम की जय🚩

बोलो खाटू नरेश की जय🚩

बोलो नीले के असवार की जय🚩

बोलो भक्त और भगवान की जय🚩🙏

जय श्री श्याम 🚩🙏🚩

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